फिर कोहरा छाने लगा, और गर्मी सुस्ता गयी ,
चंद महीने ही हुए थे तुम्हे गए, की फिर तुम आ गयी ।
कहर अभी तो न दिखाओगी, पर हवा तुम्हारा पैगाम ला गयी,
कहा सूरज ने की ठहरो कुछ दिन और, पर धूप भी तुमसे शर्मा गयी ।
कर किनारे मेरे वो मनपसन्द स्टाइलिश ड्रेसेज़, सारे स्वेटर निकलवा गयी,
चंद महीने ही हुए थे तुम्हे गए, की फिर तुम आ गयी ।
ए सी, कूलर कब के सुला दिए थे तुमने,
सीलिंग फैन को चार से एक पर गिरा गयी ।
यूँ खुश हुए कम्बल और रज़ाई अपनी महीनो की नींद टूटने से,
ठंडी धरती पर पैर रखना रुकवा गयी ।
आना तुम्हारा, आगाज़ है नए वर्ष का,
और सबके चेहरे पे मुस्कान छा गयी ।
सर्द हवा यूँ हर दिल पे छा गयी,
फिर तुम आ गयी॥॥
What an amazing creation!!! Love it Madhvi! How beautifully you have related winters onset to your life :)
ReplyDelete